The Birth of Mahabharata – Part 2

The Mahakavya of Krishna-Draupadi Read Previous Part – The Birth of Mahabharata – Part 1 Ideal King was not the mere Political King of Rashtra; in fact, King is the metaphor for the Atma (Soul) – the King of the Deha–Rashtra (Physical Body) or Self-Rashtra. And Purusha is never a gendered concept of Male. In fact, Purushais any Human Being without Ahamkara. At the Symbolic level, Vak-Sarasvati was the Goddess of Wisdom […]

The Birth of Mahabharata – Part 1

The Mahakavya of Krishna-Draupadi The mainstream Gotra Vashishthas of the GangaYamuna valley of that time viewed Parashara’s dalliance with the Nishada girl Satyavati as a scar to their Gotra pride; the Angiras particularly the Bharadvajas and Gautamas – the politically powerful Gotras of the time enjoying royal patronage of most of the ruling dynasties of Bharatavarsha – considered Parashara an outcaste Brahmin of the already objective-less Vashishthas. Vyasa […]

Shiva Thandava Stotram – शिवताण्डवस्तोत्र

Jai Shiva Shankara जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्‌। डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं चकार चंडतांडवं तनोतु नः शिवः शिवम ॥1॥ Jatatavee gala jjala pravaha pavitha sthale, Gale avalabhya lambithaam bhujanga thunga malikaam, Dama ddama dama ddama ninnadava damarvayam, Chakara chanda thandavam thanothu na shiva shivam. जिन शिव जी की सघन जटारूप वन से प्रवाहित हो गंगा जी की धारायं उनके कंठ […]

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यक्ष प्रश्न – परिणाम

पढ़े:- यक्ष प्रश्न – प्रस्तावना यक्ष प्रश्न – भाग (क) यक्ष प्रश्न – भाग (ख)   यक्ष उवाच। व्याख्यातः पुरुषो राजन्यश्च सर्वधनी नरः। तस्मात्त्वमेकं भ्रातृणां यमिच्छसि स जीवतु ॥ यक्ष ने कहा- राजन् ! जो सबसे बढ़कर धनी पुरुष है, उसकी तुमने ठीक-ठीक व्याख्या कर दी; इसलिये अपने भाइयों में से जिस एक को तुम […]

यक्ष प्रश्न – भाग (ख)

भीेमसेन उस स्थान पर गये, जहाँ वे पुरुषसिंह तीनों भाई पृथ्वी पर पड़े थे। उन्हें उस अवस्था में देखकर भीमसेन को बड़ा दुःख हुआ। इधर प्यास भी उन्हें बहुत कष्ट दे रही थी । महाबाहु भीमसेन मन-ही-मन यह निश्चय किया कि ‘यह यक्षों तथा राक्षसों का काम है।’ फिर उन्होंने सोचा; ‘आज निश्चय ही मुझे […]

यक्ष प्रश्न – भाग (क)

युधिष्ठिर जो की बुद्धिमानों में श्रेष्ठ थें अपने बुद्धि के बल पर यह पता कर लिया की उनके भाइयों की मृत्यु असहज नहीं हैं ये अवश्य ही दैविक हैं और इसका संबंध जल के सरोवर से ही हैं और इसलिए वे स्वंय ही जल में प्रवेश करते हैं तभी बगुला रूपी यक्ष उनके सामने अवतरित […]

यक्ष प्रश्न – प्रस्तावना

ये संवाद श्रीमान यक्ष (धर्म मूर्तिमान) और महाराज युधिष्ठिर के मध्य हुआ था जो की अत्यंत शूक्ष्म ज्ञान से परिपूर्ण हैं एवं सभी के लिए उपयोगी हैं । जब यक्ष रूपी धर्म ने महाराज पाण्डु के सभी पुत्र – भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव को मार डाला (मूर्क्षित) तब स्वंय युधिष्ठिर जल के लिए उस […]

Yudhishthira and Krishna: Indra & Vishnu on One Chariot 3

Part 1 Yudhishthira and Krishna: Indra & Vishnu on One Chariot 1 Part 2 Yudhishthira and Krishna: Indra & Vishnu on One Chariot 2 What ‘shreshhTha’ does, is followed by ‘itaro janaH’, in other words, we may tentatively translate it as ‘what extra-ordinary minds do’, ‘ordinary mentality follows.’ Yudhishthira’s Dharma being Manava-Dharma, the Dharma of humbleness, […]

Yudhishthira and Krishna: Indra & Vishnu on One Chariot 2

Part 1 Yudhishthira and Krishna: Indra & Vishnu on One Chariot 1 At first Yudhishthira could see the bird only, but when Drona wanted to test his firmness in concentration further, he set a ‘trap question’, and tagged the previous question with multiple choices. It should be noted that Drona’s question has the word ‘vaa’ […]